देहरादून समेत 5 जिलों में बिल्डरों की धोखाधड़ी, घर खरीदने वालों को ऐसे लगा रहे हैं चूना

बिल्डरों की मनमानी रोकने के लिए प्रदेश में रेरा का गठन हुआ था, इसके बावजूद 132 शिकायतों पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई...
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उत्तराखंड न्यूज: builder breaking rera rules in uttarakhand
Image: builder breaking rera rules in uttarakhand

देहरादून: हर इंसान अपने आशियाने का सपना देखता है। इसे पूरा करने के लिए वो जी-तोड़ मेहनत करता है, एक-एक पाई बचाता है, ताकि खुद का घर खरीद सके, पर बिल्डरों की मनमानी के आगे उसके सपने ताश के पत्तों की तरह बिखर जाते हैं। उत्तराखंड में जिस तरह बड़ी तादाद में बिल्डिंगें बन रही हैं, उसी रफ्तार से बिल्डरों के फर्जीवाड़े के मामले भी सामने आ रहे हैं। रियल स्टेट फर्जीवाड़े में फंसे ग्राहक अपनी गाढ़ी कमाई लुटा रहे हैं, तो वहीं बिल्डरों की मनमानी जारी है। बिल्डरों पर रेरा के आदेशों का भी कोई असर नहीं हो रहा। उत्तराखंड में बिल्डरों की मनमानी रोकने के लिए साल 2017 में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) बनी थी। जिसमें अब तक 405 शिकायतें पहुंची। जो शिकायतें रेरा को मिलीं, उनमें से 273 मामलों में कार्रवाई भी हुई, पर 132 शिकायतें अब भी पेंडिंग हैं। इन मामलों का सालों बाद भी निस्तारण नहीं हुआ। फ्लैट और घर खरीदने आए ग्राहक बिल्डरों की धोखाधड़ी के शिकार हो रहे हैं। जो जिले जितने विकसित हैं, वहां फ्लैट के नाम पर लोगों को ठगने का धंधा भी उतना ही फलफूल रहा है।

बिल्डरों के फर्जीवाड़े के सबसे ज्यादा मामले देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर में सामने आए हैं। इस वक्त प्रदेशभर में चल रहे करीब 250 प्रोजेक्ट रेरा में रजिस्टर्ड हैं। जिनमें से 80 प्रोजेक्ट दून में चल रहे हैं। पर फर्जीवाड़े के सबसे ज्यादा मामले भी यहीं सामने आ रहे हैं। बिल्डर ग्राहकों को झांसा देकर फ्लैट की रकम तो ले लेते हैं, पर कब्जा नहीं देते। रेरा को अब तक रिफंड से जुड़ी 2 सौ से ज्यादा शिकायतें मिल चुकी हैं। चलिए अब आपको बतातें हैं कि रेरा को किस जिले से कितनी शिकायतें मिली हैं। देहरादून में 143, हरिद्वार में 159, ऊधमसिंहनगर में 27, नैनीताल में 6 और पौड़ी में बिल्डरों की धोखाधड़ी के 2 मामलों में शिकायत मिली है। टिहरी में भी फर्जीवाड़े का एक मामला सामने आया है। बिल्डरों पर प्रोजेक्ट को अधूरा छोड़ने, समय पर पूरा ना करने, फ्लैट पर कब्जा ना देने और ग्राहकों का पैसा वापस ना लौटाने के आरोप लगे हैं। बिल्डरों पर शिकंजा कसने के लिए 2017 में स्टेट रेगुलेशन ऑफ डेवलपमेंट एक्ट 2016 अधिनियम लागू तो किया गया, पर बिल्डरों में रेरा का खौफ नहीं है। कई मामलों में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं हुई, यही वजह है कि घर के नाम पर देवभूमि के लोग लगातार लुट रहे हैं। रेरा बिल्डरों पर नकेल कसने में विफल रहा है।