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बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
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अल्मोड़ा: आज के वक्त में अगर सबसे बड़ा जानवर कोई है, तो वो है इंसान। वन्यजीवों में सोचने-समझने की क्षमता नहीं होती। वो सिर्फ भूख लगने या खतरा होने पर ही हमला करते हैं, लेकिन इंसान तो बुद्धि होते हुए भी प्रकृति और वन्यजीवों का विनाश करने में लगा हुआ है।
ऐसी ही एक घटना अल्मोड़ा में हुई है। यहां कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटे मरचूला बाजार में एक बाघिन को गोली मार दी गई। सोमवार रात बाघिन आबादी के बीच पहुंच गई थी, लेकिन उस बेजुबान को क्या पता था इस गलती की सजा के तौर पर उसे मौत दे दी जाएगी। दहशत के बीच किसी ने बाघिन को गोली मार दी। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बाघिन के शव को कब्जे में ले लिया। उसकी उम्र करीब 12 साल बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि बाघिन को मरचूला बाजार में देख लोग छतों में पहुंचकर शोर मचाने लगे थे। आगे देखिए वीडियो
घबराई बाघिन ने भीड़ को देखकर दुकानों में घुसने की कोशिश की तो उसे किसी ने गोली मार दी। बाघिन मौके पर ही ढेर हो गई। पोस्टमार्टम में बाघिन के शरीर में कई आंतरिक चोटों के निशान पाए गए। साथ ही शरीर से गोली के छर्रे बरामद हुए हैं। उत्तराखंड में इन दिनों गुलदार-बाघ का आतंक है, लेकिन लोगों को ये अधिकार किसने दिया था कि वो बाघिन को मार दें। सवाल ये है कि क्या वन विभाग ने बाघिन को आदमखोर घोषित किया था और अगर ऐसा नहीं है तो उसे क्यों मार दिया गया। ये अधिकार सिर्फ वन विभाग के पास है। बाघिन को मारने वाली भीड़ के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। एक तरफ बाघों के संरक्षण की बात हो रही है तो वहीं बेजुबानों को मारते हुए लोगों के हाथ नहीं कांप रहे। रेंजर अमोल ईष्टवाल ने कहा कि पोस्टमार्टम में बाघिन के फेफड़े पंक्चर पाए गए। इसके अलावा बाघिन में मल्टी ऑर्गन इंजरी भी पाई गई है। उसके शरीर से गोली के छर्रे भी बरामद हुए हैं। मामले की जांच जारी है। देखिए वीडियो