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No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..
Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.
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पौड़ी गढ़वाल: कोटद्वार के रिखणीखाल प्रखंड के अंतर्गत ग्राम डल्ला में वन्यजीव मानव गतिविधि से हर कोई त्रस्त है। यहां बाघ की दहशत साफ तौर पर देखने दिख रही है।
बीते रविवार को गांव में ग्रामीणों को एक साथ दो बाघ नजर आए। बता दें 25 अप्रैल की शाम विभाग ने ग्राम डल्ला से लगे ग्राम जूई में एक बाघ को ट्रेंकुलाइज कर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अंतर्गत ढेला रेस्क्यू सेंटर में भेज दिया गया था। तब थोड़ी शान्ति थी मगर फिर दो बाघ दिखने से ग्रामीणों में दहशत पसर गई है। ग्रामीणों ने शोर मचा कर बाघों को गांव से दूर करने का प्रयास किया। बताते चलें कि बीती 13 अप्रैल को बाघ ने ग्राम डला में बुजुर्ग वीरेंद्र सिंह को निवाला बना दिया था। आगे पढ़िए
इस घटना के बाद वन विभाग ने गांव में करीब 12 दिन तक बाघ को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ने का प्रयास किया। लेकिन, बाघ विभाग को चकमा देता रहा। गांव में लगातार दो बाघ नजर आ रहे थे। लेकिन, वन महकमा उन्हें नहीं पकड़ सका। 25 अप्रैल की शाम विभाग ने ग्राम डल्ला से लगे ग्राम जूई में एक बाघ को पकड़ टाइगर रिजर्व के अंतर्गत ढेला रेस्क्यू सेंटर में भेज दिया गया। कुछ दिन की शांति के बाद करीब दो सप्ताह पूर्व एक बार फिर ग्राम डल्ला में दो बाघ नजर आए। ग्रामीण राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि गांव वालों ने शोर मचा कर बाघ को भगाने का प्रयास किया। लेकिन दोनों बाघ दूर जाने के बजाय ग्रामीणों की तरफ आने लगे। जिसके बाद ग्रामीण घरों में कैद हो गए हैं। बाघ देखे जाने के बाद से गांव में दहशत पसरी हुई है।