उत्तराखंड के खटीमा स्थित सुरई वन रेंज में जंगल में मवेशी चराने गए एक बुजुर्ग की बाघ के हमले में दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई है और वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: 69-year-old man died in a Leopard attack
उधमसिंह नगर: उधम सिंह नगर जिले के खटीमा क्षेत्र में बाघ के हमले से एक ग्रामीण की मौत हो गई, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। यह दर्दनाक घटना सुरई वन रेंज के बग्गा चौवन इलाके में सामने आई, जहाँ जंगल में मवेशी चराने गए 69 वर्षीय बुजुर्ग को बाघ ने अपना शिकार बना लिया।
69-year-old man died in a Leopard attack
परिजनों के अनुसार, मृतक शेर सिंह कन्याल रोज की तरह रविवार को भी अपने मवेशियों को जंगल ले गए थे। शाम होते ही मवेशी तो घर लौट आए, लेकिन शेर सिंह के न आने पर ग्रामीणों को चिंता हुई। खोजबीन के दौरान जंगल में उनकी जैकेट मिली और जमीन पर घसीटने के निशान दिखाई दिए। निशानों का पीछा करने पर कुछ दूरी पर उनका क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ।
शव के पास देखे गए दो बाघ
ग्रामीणों का दावा है कि घटना स्थल के पास उन्हें दो बाघ नजर आए। इसके बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। देर शाम वन विभाग और ग्रामीणों की मदद से शव को जंगल से निकालकर नागरिक चिकित्सालय खटीमा भेजा गया, जहाँ पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। सुरई वन रेंज के रेंजर राजेंद्र सिंह मनराल ने बताया कि बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। इसके साथ ही वन क्षेत्रों से सटे गांवों में वन कर्मियों की गश्त बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों से फिलहाल जंगल में न जाने की अपील की गई है और बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने पर भी विचार किया जा रहा है।
मुआवजा और फेंसिंग की मांग
वन विभाग ने बताया कि मृतक के परिजनों को वन अधिनियम के तहत मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि परिवार को आर्थिक सहायता मिल सके। खटीमा विधायक भुवन कापड़ी ने घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि वन क्षेत्र से सटे गांवों की सीमा से एक किलोमीटर तक फेंसिंग की जानी चाहिए, ताकि जंगली जानवर गांवों में प्रवेश न कर सकें। उन्होंने वन विभाग से मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने और मृतक परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की। खटीमा में हुआ यह हादसा एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर करता है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे हादसे आगे भी ग्रामीणों की जान पर भारी पड़ सकते हैं।